भूपेंद्र बरेठ एवं समूह ने रायगढ़ कथक शैली में बिखेरी लय, ताल और भाव की अनुपम छटा
Riport by yogesh chouhan

रायगढ़, 20 सितम्बर 2026
41वें अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चक्रधर समारोह की सांस्कृतिक संध्या में पद्मश्री पं.रामलाल बरेठ के निर्देशन में गुरु भूपेंद्र बरेठ एवं सहयोगी कलाकारों ने शुद्ध कथक शैली की शानदार प्रस्तुति देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। करीब 10 कलाकारों की सामूहिक प्रस्तुति में रायगढ़ कथक घराने की विशिष्टता, लयकारी, ताल पक्ष और भावाभिनय का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
प्रस्तुति का शुभारंभ शिव वंदना से हुआ, जो राग शंकरा एवं तात चौतात में निबद्ध थी। कलाकारों ने अपनी सधी हुई नृत्य मुद्राओं, पद संचालन और भावपूर्ण अभिव्यक्ति से भगवान शिव की आराधना को मंच पर जीवंत कर दिया। इसके पश्चात ताल पक्ष में ताल धमार पर आधारित रायगढ़ कथक शैली की प्रस्तुति हुई। नृत्या खत्री, आयुषी दुबे एवं संचिता दास ने अपनी शानदार लयकारी, गतियों अृौर पद संचालन से कथक की तकनीकी सुंदरता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। भाव पक्ष में गुरु भूपेंद्र बरेठ ने महाराजा चक्रधर सिंह द्वारा रचित भावगीत ‘चंद्रबदने मृगलोचनी’ पर मनोहारी अभिनय प्रस्तुत किया। इसके साथ ही महाराजा चक्रधर सिंह की रचनाओं पर आधारित चित्रात्मक प्रस्तुति ने समारोह के सांस्कृतिक वैभव को और समृद्ध किया।
गुरु भूपेंद्र बरेठ रायगढ़ घराने की कथक परंपरा के प्रमुख कलाकारों में शामिल हैं। उन्होंने पद्मश्री पं. रामलाल बरेठ एवं पं. कार्तिक राम से कथक की शिक्षा प्राप्त की है। कथक के साथ तबला एवं संगीत में भी उन्होंने प्रशिक्षण लिया है। देश के विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों और समारोहों में अपनी प्रस्तुतियां दे चुके भूपेंद्र बरेठ रायगढ़ कथक शैली की परंपरा को आगे बढ़ाने में निरंतर योगदान दे रहे हैं। समारोह की इस प्रस्तुति में कलाकारों ने अपनी साधना, अनुशासन और उत्कृष्ट नृत्य कौशल से महाराजा चक्रधर सिंह की समृद्ध कथक परंपरा को जीवंत किया।

